GangaTeeri Gau

भारत में पहली बार शुद्ध भारतीय गंगातीरी गाय के दूध से बना

  • पवित्र गंगा की तराई में विचरण करने वाली सफेद रंग की गौमाता की नस्ल को गंगातीरी गाय के नाम से जाना जाता है ।
  • गंगा तीरी गौ माता का क्षेत्र गंगा की तराई है जो पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार से लेकर पश्चिम बंगाल तक फैला है ।
  • किंतु लगातार तिरस्कृत होने के कारण अब यह नस्ल लगभग विलुप्तप्राय अवस्था में पहुंच गई है ।
  • यह शुद्ध भारतीय गाय गंगा किनारे औषधीय गुणों से भरपूर घास, दुर्लभ वनौषधी एवं जड़ी-बूटी खाकर अमृत तुल्य पंचगव्यों का निर्माण करती है ।
  • शुद्ध गंगाजल इन पंचगव्यों को और भी विलक्षण बना देता है ।

ऐतिहासिक तथ्य: विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध सभ्यता भारतीय सभ्यता है। और भारत की सभ्यता का उदगम गंगा किनारे हुआ। इसी गंगा किनारे वाली सभ्यता का अटूट हिस्सा गंगातीरी गाय रही है। भगवान राम, भगवान कृष्ण,भगवान महावीर , महर्षि आर्यभट्ट जैसे व्यक्तित्वों का निर्माण इसी गंगा और इसकी सहायक यमुना किनारे वाली सभ्यता और गंगातीरी गाय के दूध , माखन और घृत से हुआ।
आज भारतीय गौवंश को भुलाने का परिणाम ये हुआ कि इस देश मे अब ना कोई ऋषि पैदा होता है ,ना कोई महापुरुष ,ना ही कोई वैज्ञानिक ।
भारतीय गंगातीरी गौ माँ के संरक्षण से इसी सभ्यता को पुनर्जीवित करने का बेहद सूक्ष्म(समुद्र में एक बूंद से भी छोटा) प्रकल्प है गौअमृतम घृत ।
गौअमृतम घी को भारत में पहली बार इसी गंगातीरी गाय के दूध से बनाया गया है।

गंगातीरी गाय के दूध की विशेषताएं:

  • उजली होने के कारण गंगातीरी का दूध उच्च कोटि का वातनाशक होते हुए त्रिदोष नाशक भी है अर्थात् वात, पित्त और कफ को एक साथ संतुलित करने की अद्भुत क्षमता लिए हुए।
  • मेधाशक्ति, स्मरण शक्ति एवं तार्किक शक्ति बढ़ाने वाला प्राकृतिक रसायन।
  • शीघ्र पचने वाला इसलिए नवजातों के लिए भी उपयुक्त।
  • आंतों को साफ रखने वाला अति उत्तम रेचक।
  • कैल्शियम मैग्नीशियम आदि खनिजों का प्राकृतिक खजाना।
  • विटामिन ए और विटामिन डी से भरपूर।
  • स्वस्थ शरीर का संपूर्ण आहार।

विशेष जानकारी: आयुर्वेद अनुसार शरीर मे सिर्फ तीन दोष हैं

  • वात: वायु
  • पित्त: अग्नि
  • कफ: जल

अगर ये तीनो दोष सम हैं तो शरीर निरोगी है। और गंगातीरी गौ माँ का दूध इन तीनो को ही सम रखता है।